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बिना स्वीकृति खोद डाली डबरी

जाने क्या है पूरा मामला

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जनपद अधिकारियों की मिली भगत से सरपंच सचिव निजी जमीन में बगैर स्वीकृति करा रहा डबरी निर्माण।

डबरी की मिट्टी का हो रहा पास में बन रही सड़क/रोड के फाउंडेशन में स्तेमाल।

 

सागर,खुरई।
आपको यह जानना जरुरी है कि आज कल खुरई जनपद पंचायत भ्रष्टाचार के चलते इन दिनों सुर्खियों में है।लगातार नए नए मामले रोज समाचार पत्रों की हेड लाइन बने हुए है।आपको बतादे। कि पहली धांगर पंचायत के बाद अब मुहांसा पंचायत भी इन दिनों सुर्खियां बटोर रही है।ऐसा एक मामला फिर प्रेस के सामने आया है।जोकि भ्रष्टाचार का एक मात्र छोटा सा ट्रेलर है।पूरी फिल्म इसकी बहुत लंबी है।जिसका मैं आपके सामने स्टेप बाय स्टेप हर एक मामले का खुलासा करूंगा।इस कड़ी में
खुरई जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मुंहासा मे सरपंच सचिव मिल कर बनवा रहा बिना स्वीकृत किए निजी जगह में डवरी /तालाब वह भी मशीनो से करवाई जा रही खुदाई। मजदूरों के हक को एवं योजना के उद्देश को ताक पर रखते हुए शासन की महत्वपूर्ण योजना मनरेगा के काम बेहिचक/निडरता से दिन दहाडे मशीन चलवा कर, कर रहा डबरी/तालाब का निर्माण।ओर बाद मे सरपंच सचिव,एवं जनपद अधिकारी मस्टररोल बना के लाखो की राशी निकालकर बंदरबांट करने के लिए तैयार बैठे है। प्रेस टीम को इसकी
सूचना मिलते ही,जब इस संबंध मे प्रेस टीम ने मुहांसा पंचायत सचिव मुकेश नामदेव से सवाल पूंछा कि क्या कार्य हो रहा है आपकी पंचायत में,इस पर पहले तो, वो साफ मुकर गया।और कहां कि मेरी पंचायत में कोई कार्य ही नहीं हो रहा है।इस सवाल पर सचिव मुकेश नामदेव ने पूरी अनभिज्ञता जाहिर की।बावजूद इसके प्रेस टीम द्वारा मौके का निरीक्षण किया गया।जो, सूचना सही पाई गई।मौके पर जेसीबी मशीन से डबरी की खुदाई एवं 7,8 ट्रैक्टरों ट्रालियों से मिट्टी ढोने में लगे हुए पाए गए।यह मिट्टी पास बन रही सड़क/रोड के फाउंडेशन में डाली जा रही हैं।
यह कार्य देख जब पत्रकार ने पंचायत सचिव मुकेश नामदेव से सवाल पूंछा कि इस कार्य का मस्टररोल कहां है दिखाइए आप मुझे, तो सचिव का चौंका देने वाला जबाव सामने आया। सचिव बोला कि,,मस्टररोल बाद में जारी किया जाएगा।बाद इसके मस्टररोल के माध्यम से राशी आहरित कर लेगे।अब आपको बता दे,यह जानना जरूरी कि जब मजदूर काम करता है तो उसकी हाजरी रोज मस्टररोल पर डाली जाती है।मास्टर रोल सबसे पहले तैयार किया जाता है जिससे यह पता रहे कि कौन सा मजदूर कितने दिन आया और कितने दिन नही आया,यानी उसने कितने दिन योजना अंतर्गत काम किया है।जिसमे कार्य का पूरा हिसाब रहता है।तभी मजदूर की मजदूरी, उसके खाते में डाली जाती है।रोचक बात
वहीं ग्रामीणों का कहना है कि जब सरपंच सचिव,जनपद अधिकारियों से मिल कर निजी जमीन में डबरी/तालाब खुदवा रहा है तो वह जमींदार ग्राम वासियों के उपयोग के लिए पानी नहीं उठाने देगा।इसका फायदा सिर्फ वही उठाएगा राशि शासन की खर्च करेगा।ग्रामीणों ने कहा यह डबरी की निकलने वाली मांटी पास में ही बन रही शासकीय,सड़क/रोड में फाउंडेशन के लिए ट्रेक्टरो,ट्रालियों द्वारा डाली जा रही है।/स्तेमाल की जा रही है।यह जानने योग्य है कि किस तरह निजी जमीन में मशीन से डबरी,खुदाई करके मिट्टी शासकीय रोड,के फाउंडेशन में स्तेमाल कर दोनो तरफ से सरकारी राशि हड़प कर निजी स्वार्थ हेतु कार्य किया जा रहा है।जिसका ग्रामीणों को कोई शासन की महत्वकांक्षी योजन मनरेगा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।और योजना को पलीता दिखा कर मजदूरों के हक पर दिन दहाड़े डांका डाला जा रहा।
अब आप जान सकते है कि यहां तो गंगा उल्टी ही बह रही है।इसी तरह हम हर एक मामले का खुलासा करेगे।ताकि जरूरत मंदो को शासन,की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ मिल सके।
जब इस संबंध में मुख्य कार्य पालन अधिकारी जनपद पंचायत मीना कश्यप खुरई से फोन पर बात करना चाहा तो उन्होंने फोन को रिसीव ही नही किया।और न, ही कोई जवाब आया।

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